ई साल कफनाम दे — 2025 की रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर: एक नई दास्तान

जब 2008 में आईपीएल शुरू हुआ था, तब से लेकर अब तक आरसीबी के फैंस ने हर सीजन उम्मीद की एक किरन दिल में जगाई थी — “इस बार हमारा साल है।”
लेकिन सच कहें तो, कुछ सीज़न छोड़ दें तो हर बार निराशा ने दस्तक दी। 2016 के विराट कोहली वाले जादुई सीज़न को अगर छोड़ दें, तो बाकी सब साल “कफनाम” ही रहे। पर 2025 में? कहानी ही बदल गई है। इस साल की आरसीबी वही पुरानी टीम नहीं है। ये एक नई, आक्रामक, बेलगाम, फुल ऑन रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर है — जो सिर्फ नाम से नहीं, खेल से भी रॉयल हो गई है।

हर मैदान फतेह, हर शहर जीत

इस साल आरसीबी ने जो कारनामा किया है, वो तो सपने जैसा है। पंजाब को उसके घर में हराना। दिल्ली को दिल्ली में पटखनी देना। केकेआर को उसके किले ईडन गार्डन्स में मात देना। चेन्नई को चेपॉक में धूल चटाना। मुंबई इंडियंस को वानखेड़े में हराना। राजस्थान को जयपुर में हराना।
आरसीबी 2025 वह पहली टीम बन गई है जिसने घर से बाहर लगातार छह जीत दर्ज की हैं।
छह बाहर जीत। सात कुल जीत। नंबर वन पोजीशन। क्या आप सोच सकते हैं? आरसीबी फैंस तो खुद को चुटकी काट रहे हैं — “भाई ये सपना तो नहीं?”

हर बार स्टैंडिंग्स चेक कर रहे हैं। कहीं कोई सिस्टम ग्लिच तो नहीं? ऑरेंज कैप – विराट कोहली।
पर्पल कैप – जोश हज़लवुड।
टीम रैंकिंग – नंबर 1।
“कह दो कि ये झूठ नहीं है!” — यही मनोभाव है बैंगलोर के हर कोने में।

विराट कोहली का रिवाइवल: बादशाह लौट आया

विराट कोहली। नाम ही काफी है। लेकिन इस साल का विराट अलग है। सात बार 25+ स्कोर। और हर बार आरसीबी जीत गई।
तीन मैचों में जब उन्होंने 25 से कम रन बनाए, बस वही मैच आरसीबी हारी।
यानि विराट का बल्ला बोले, तो आरसीबी बोले। और जब वह बोलता है, तो फटाफट बोले — 170 के स्ट्राइक रेट पर।
विराट इस सीज़न में सिर्फ रन नहीं बना रहे — वो लीड कर रहे हैं, इंस्पायर कर रहे हैं। रन चेज़ करते समय उनकी कूलनेस और एंकरिंग देखकर लग रहा है — “किंग इज बैक।”

जोश हज़लवुड: डेथ ओवर का नया सुल्तान

2016 के बाद अगर किसी ने आरसीबी के डेथ ओवर्स की बैंड बजाई थी, तो वो गेंदबाजी थी।
लेकिन इस बार नहीं।
जोश हज़लवुड ने अंतिम ओवरों में ऐसा जलवा दिखाया है कि मुंबई इंडियंस भी ईर्ष्या करे।
सिंगल हैंडली, डिफेंडिंग टोटल्स। आखिरी ओवरों में विकेट्स। दबाव में स्टंप तोड़ते यॉर्कर।
हज़लवुड पर्पल कैप होल्डर हैं।
यह वही आरसीबी है, जो कभी 18वें, 19वें ओवर में मैच गंवा देती थी। अब वही ओवर्स में मैच जिताती है।

कुणाल पांड्या और युवा ब्रिगेड का धमाका

जिस कुणाल पांड्या को मुंबई ने एक वक़्त में “फिनिशर” के रोल से हटा दिया था, वही अब आरसीबी के लिए बुलेट है।
नौ साल बाद आईपीएल में शतक।
47 रन पर जब कुणाल थे, तो मैदान पर तूफान आ गया।
47 बॉल 73 रन।
धीमी शुरुआत के बाद इतनी ताबड़तोड़ बैटिंग कि दिल्ली के बॉलर सिर्फ पिच घूरते रह गए।
कुणाल का एक्सलरेशन एक मिसाल है — 27 गेंद पर 25 रन से, 47 गेंदों पर 73 रन तक का सफर।
उनकी हिटिंग सिर्फ रन नहीं, स्टेटमेंट थी — “आरसीबी बदल गई है।

और क्या कहें — सुयश शर्मा का लेग स्पिन। क्रुणाल का बाउंसर। भुवी का डेथ ओवर्स जादू।
डेविड विली का बैकअप फिनिशर बनना।
देवदत्त पडिक्कल का आक्रामक इंटेंट।
हर जगह एक नया हीरो। हर मैच एक नई कहानी।

भुवी की वापसी: फिनिशर भुवनेश्वर कुमार

भुवनेश्वर कुमार, जो कभी डेथ ओवर्स में पिटते थे, अब डेथ ओवर्स के महारथी बन गए हैं।
19वें ओवर में सात रन देकर तीन विकेट।
आखिरी दो ओवरों में घातक यॉर्कर और अचूक लाइन लेंथ।
भुवी का यह अवतार देखकर 2016 के स्विंग मास्टर की यादें ताजा हो गईं।
कौन कह सकता है कि ये वही खिलाड़ी हैं जिन्हें कभी टीम इंडिया से ड्रॉप कर दिया गया था?

RCB 2025: सिर्फ जीत नहीं, करारा जवाब

आरसीबी सिर्फ मैच नहीं जीत रही, वो जवाब दे रही है।
दिल्ली से हारने पर दिल्ली में रौद्र रूप।
पंजाब से हारने पर मोहाली में पलटवार।
केकेआर के खिलाफ हार पर ईडन गार्डन में धुआंधार प्रदर्शन।

हर हार का हिसाब उसी शहर में बराबर।
“कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे” — जैसे मैदान पर स्टैम्प लग गया हो।

आरसीबी फैंस: झूम उठे हैं

इतने सालों के बाद जो फैंस “ई साला कप नाम दे” चिल्लाते रहे, अब वो असल में यकीन कर रहे हैं —
“ई साला कफनाम दे।”
हर जीत के बाद फैंस की आंखों में आंसू। लेकिन इस बार खुशी के।
हर ट्विटर ट्रेंड पर बस एक ही नारा — “#PlayBoldForReal”
कहीं विराट के 4000 रन पूरे होने का जश्न। कहीं हज़लवुड के 25 विकेट पूरे होने की खुशी। कहीं कुणाल के शतक पर जश्न।
RCB फैंडम इस वक्त पूरे जोश, जुनून और इमोशन पर सवार है।

फाइनल की ओर: क्या इस बार कहानी पूरी होगी?

तो सवाल ये नहीं है कि आरसीबी अच्छा खेल रही है।
सवाल अब ये है —
क्या ये साल RCB का साल है?
क्या 18वें सीजन में, 18 साल बाद, ई साला कफनाम दे सच हो जाएगा?
क्या विराट कोहली वो ट्रॉफी उठाएंगे जिसके लिए उन्होंने आधी जिंदगी झोंक दी?

अगर मौजूदा फॉर्म देखें, टीम की संतुलन देखें, विराट का फॉर्म देखें, गेंदबाजी का दम देखें —
तो जवाब एक ही दिखता है:
हां, ये साल उनका हो सकता है।

अंत में

आरसीबी फैंस! जो सपना आपने 2008 से देखा था, वो अब धुंधला नहीं, चमकता हुआ नजर आ रहा है।
ये टीम अलग है। ये सीज़न अलग है।
हर गेंद, हर रन, हर कैच, हर विकेट — बस एक ही सिग्नल दे रहा है:

“ई साला कफनाम दे!”

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