क्रिकेट की सबसे प्यारी बात यही है कि इसमें “पास्ट पास्ट होता है”, वो भविष्य को प्रभावित नहीं करता। आपने कल क्या किया, उससे आज के स्कोरबोर्ड पर कोई फर्क नहीं पड़ता। और आईपीएल 2025 में दिल्ली कैपिटल्स ने ये बात बड़ी कीमत पर सीखी – वो भी गुजरात टाइटंस से, एक ऐसी टीम से, जो अपने जोश, जुनून और जोस (बटलर) के दम पर जंगल की असली शेर बन गई है।
दिल्ली के लिए मंच वही था – बड़े रन, बड़ी टीम, और सामने फिर वही मिचेल स्टार्क। लेकिन जो हुआ, वो किसी ने नहीं सोचा था। 10 रन चाहिए थे आखिरी ओवर में, स्टार्क के हाथ में गेंद थी, और सामने थे राहुल तेवतिया – एक ऐसा नाम जो आईपीएल में ‘फिनिशर’ शब्द का पर्याय बन गया है। और तेवतिया ने वही किया जो सुपरहीरो करते हैं – पहले दो गेंदों पर ही काम तमाम कर दिया।
दिल्ली की आँखों में सवाल थे – “हेटमायर नहीं कर पाया, ध्रुव जुरेल चूक गए, तो तेवतिया कैसे कर लेगा?” लेकिन क्रिकेट का यही रोमांस है – जब भी आप सोचते हैं कि कहानी खत्म हो गई, कोई न कोई नया किरदार एंट्री ले लेता है और पूरी स्क्रिप्ट बदल देता है। तेवतिया ने स्टार्क के खिलाफ जो किया, वो एक जवाब था – “हम भी खिलाड़ी हैं साहब, हर दिन रविवार नहीं होता, आज शनिवार है।”
204 रन… और भी कम लगे
दिल्ली ने 203 रन बनाए – स्कोरबोर्ड पर देखो तो लगता है कि अच्छा स्कोर है। लेकिन पिच, ग्राउंड डायमेंशन, और गुजरात की बैटिंग लाइनअप को देखो, तो साफ दिखता है कि 15-20 रन कम थे। और ये बात खुद अक्षर पटेल ने भी मानी।
दिल्ली की इनिंग्स को देखें, तो सबको शुरुआत मिली – केएल राहुल तेज शुरू हुए, अभिषेक पोरेल ने भी बैटिंग में फ्लो दिखाया, करुण नायर 30 के पार गए, अक्षर पटेल ने कवर अप किया, आशुतोष शर्मा ने कुछ शॉट्स दिखाए – लेकिन कोई भी उस 30-40 के स्कोर को 80-100 में नहीं बदल पाया। और यही वो कमी थी जो अंत में भारी पड़ी।
फ्रैज़र मैकगर को बाहर बैठाकर करुण नायर को ओपनिंग दिलवाना समझदारी थी। लेकिन फिनिशिंग टच मिसिंग था। स्कोर बोर्ड पर रन थे, मगर उनमें वो “दहशत” नहीं थी जो एक चेज़ को मुश्किल बना देती है।
जोस द बॉस: राजस्थान से रिलीज़, गुजरात में रॉयल
कहते हैं कि किसी की कद्र तभी समझ आती है जब वो हाथ से निकल जाए – और राजस्थान रॉयल्स ने इस बात का सबूत पेश किया जब उन्होंने जोस बटलर को रिटेन नहीं किया। और गुजरात ने क्या किया? उन्हें लिया, खिलाया, और बटलर ने वही किया जो वो सबसे अच्छे से करते हैं – एकतरफा मैच को रौंद दिया।
54 गेंदों पर 97 रन। 11 चौके। 4 छक्के। और वो भी ऐसे वक़्त में जब टीम को उनसे दरकार थी। बटलर हमेशा 90s के आसपास फंसते हैं – ये उनका छठा 90+ स्कोर है आईपीएल में, विराट कोहली और शिखर धवन से भी ज्यादा। लेकिन इन 97 रनों की अहमियत शायद किसी सेंचुरी से कहीं ज्यादा थी – क्योंकि ये रन आए रनचेज़ में, एक दबाव भरे माहौल में, और एक ऐसे स्कोर के सामने जो दिल्ली के हिसाब से काफी था।
और हां, एक सीन याद रखिए – बटलर जब आउट हुए, तो जोश में नहीं, जिम्मेदारी में। उनका काम हो चुका था।
राहुल तेवतिया: जो कहानी बनते-बनते बार-बार छूट जाती है
राहुल तेवतिया आईपीएल के वो खिलाड़ी हैं जिनका नाम ‘हीरो’ बनने के करीब आता है, और फिर कहानी बदल जाती है। लेकिन इस बार उन्होंने स्क्रिप्ट अपने हाथ में ली। मिचेल स्टार्क के सामने न झुके, न डरे, न रुके। पहली दो गेंदों पर ही 10 रन निकाल कर उन्होंने दिखा दिया कि वो नाम नहीं, काम से चलते हैं। उनकी ये फिनिशिंग एक टाइट स्क्रिप्ट में क्लाइमैक्स का धमाका थी।
साईं सुदर्शन: कंसिस्टेंसी का दूसरा नाम
गुजरात की जीत में बटलर की क्लासिक इनिंग्स के अलावा जो दूसरा सबसे बड़ा स्तंभ रहा, वो थे साईं सुदर्शन। इस खिलाड़ी की कहानी बड़ी प्यारी है – ना ज्यादा लाइमलाइट, ना हेडलाइन बनाने वाले शॉट्स – बस हर मैच में रन बनाते जाना। आज 36, पिछले मैचों में 56, 82, 49, 63, 74… क्या शानदार कंसिस्टेंसी है!
लगता है कि ये खिलाड़ी अब इंडिया कॉलअप के दरवाज़े पर खड़ा है – और उस दरवाज़े के पीछे सिलेक्टर्स को उसका दरवाज़ा खटखटाना सुनाई दे रहा होगा।
केएल राहुल: पुराने वाले राहुल की वापसी
केएल राहुल इस सीज़न में अलग ही अंदाज़ में खेल रहे हैं – कप्तानी का बोझ नहीं है, और शायद इसीलिए वो आज़ाद भी खेल रहे हैं। 6 मैच में 266 रन, स्ट्राइक रेट 160 के करीब, और 2 बार मैन ऑफ द मैच। 200 छक्के पूरे करने वाले भारत के पहले बल्लेबाज़ बन गए हैं। और सबसे खास बात – उनका इंटेंट।
वो ‘टुक-टुक’ वाला राहुल नहीं दिख रहा। वो बैकफुट से खेलकर स्ट्राइक घुमाने वाला राहुल नहीं – अब वो राहुल दिख रहा है जो बॉलर पर हावी होना चाहता है। और अगर ये फॉर्म बरकरार रहा, तो टी20 वर्ल्ड कप के लिए उनका दावा और मज़बूत हो जाएगा।
प्रसिद्ध कृष्णा: पर्पल कैप होल्डर की परफेक्ट वापसी
गुजरात टाइटंस के लिए एक और सरप्राइज पैकेज रहे हैं – प्रसिद्ध कृष्णा। जो रोल कभी मोहम्मद शमी निभाते थे, अब वही प्रसिद्ध कर रहे हैं। सात मैच में 14 विकेट, और इकोनॉमी सिर्फ 7 के आसपास।
हर मैच में वो टॉप ऑर्डर तोड़ते हैं – केएल राहुल, करुण नायर जैसे बड़े विकेट उनके नाम हैं। चार ओवर 24 रन, 3 विकेट… चार ओवर 26 रन, दो विकेट… ये आंकड़े नहीं, ये बयान हैं – कि कृष्णा अब शांति नहीं, तूफान का नाम है।
दिल्ली की फील्डिंग: गिरते कैचेस, गिरते इरादे
अगर दिल्ली को कोई और चीज ले डूबी, तो वो थी फील्डिंग। एक-दो नहीं, कई कैच छूटे – और वो भी आसान। ऐसा लग रहा था कि टीम मैदान में उतनी जोश में नहीं है जितना एक टाइट मैच मांगता है। दिल्ली की ये सुस्ती गुजरात के जोश के सामने टिक नहीं पाई।
गुजरात की पहली 200+ चेज़ और पॉलिटिकल पंच
दिल्ली के खिलाफ अब तक कोई भी टीम 200+ रन चेज़ नहीं कर पाई थी – लेकिन गुजरात ने वो भी कर दिया। इससे पहले SRH ने 2008 में 188 चेज़ किया था दिल्ली के खिलाफ – और अब 204 का रिकॉर्ड टूट गया।
थोड़ा मज़ाक में सही, लेकिन सच यही है कि आजकल चाहे पॉलिटिक्स हो या क्रिकेट – दिल्ली को हराने का काम गुजरात ही कर रहा है।
आगे क्या? जंगल खुल चुका है!
अब आईपीएल 2025 पूरी तरह खुल चुका है – दिल्ली की हार से टेबल में बड़ा बदलाव आया है। गुजरात टाइटंस टेबल टॉप पर हैं। अब पंजाब किंग्स और RCB की भिड़ंत बची है – अगर पंजाब जीतती है तो वो भी टॉप पर पहुंचेगी, और अगर RCB जीतती है तो प्वाइंट्स टेबल में अफरा-तफरी होगी।
ये जंगल अब पूरी तरह खुल चुका है – सब अपनी ताकत दिखा रहे हैं। जो भी असली बाहुबली होगा, वही इस जंगल का राजा बनेगा।
तो दोस्तों, यही थी पूरी कहानी – जोस बटलर के क्लास, तेवतिया के क्लच, केएल राहुल के इंटेंट, साईं सुदर्शन की कंसिस्टेंसी और प्रसिद्ध कृष्णा की विनिंग लाइन लेंथ की। दिल्ली कैपिटल्स की हिम्मत टूटी है, और गुजरात टाइटंस की जीत ने बता दिया है – “हम हैं जंगल के असली टाइगर!”
अब आप बताओ, आपको क्या लगता है – इस जंगल में सबसे ताकतवर कौन है?
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