“कुछ हारें गले में फंदे जैसी होती हैं — जो आपने खुद ही पहनी हो।”
24 अप्रैल 2025 को बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में आरसीबी और राजस्थान रॉयल्स की भिड़ंत हुई। RCB जो अपने घर में लगातार हार से जूझ रही थी, उनके खिलाफ एक टीम थी जो पॉइंट्स टेबल में टॉप 2 पर थी। लेकिन अंत में नतीजा? RCB की पहली होम जीत, और राजस्थान की लगातार तीसरी जीताजीताया मैच में हार।
और इस कहानी के असली किरदार? विराट कोहली? नहीं। जोस हज़लवुड? नहीं। असली किरदार हैं — ध्रुव जुरेल और शिमरन हेटमायर। दो ऐसे नाम जिनकी बैटिंग से न रौशनी निकली, न ही उम्मीद।
पहला हाफ: विराट- पडिक्कल की दस्तक और 200+ का स्कोर
टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी RCB ने सीज़न का सबसे संतुलित बैटिंग प्रदर्शन किया। विराट कोहली – उम्र भले ही बढ़ रही हो, लेकिन क्लास कभी बूढ़ा नहीं होता। एक और अर्धशतक, और वो भी तेज़ अंदाज़ में। दूसरी छोर पर थे देवदत्त पडिक्कल, वही पडिक्कल जिन्हें राजस्थान ने ठुकरा दिया था।
27 गेंद में 50 रन – पडिक्कल ने अपनी पुरानी टीम को बल्ले से जवाब दिया।
205 रन का टारगेट। चिन्नास्वामी में ये स्कोर डिफेंडेबल नहीं कहा जा सकता। और जब शुरुआत वैसी हो जैसी यशस्वी जयसवाल ने दी, तब तो हर किसी ने राजस्थान को 2 पॉइंट्स का पक्का हक़दार मान लिया।
राजस्थान की पारी: 9 ओवर, 110 रन और यहीं से शुरू हुआ पतन
जब 9 ओवर में 110 रन बन चुके हों, विकेट आपके पास हों, और आपके पास स्ट्राइक में हो सैमसन-पराग जैसे खिलाड़ी — तो हार का कोई तर्क नहीं बनता।
लेकिन राजस्थान रॉयल्स हार के तर्क नहीं ढूंढती, वह हार इजाद करती है।
यशस्वी जयसवाल (41), सैमसन (38), रियान पराग (30) – सबने नींव रख दी थी। लेकिन 10वें ओवर में जैसे ही ध्रुव जुरेल मैदान पर आए, मैच की रफ्तार ICU में चली गई।
ध्रुव जुरेल: 23 गेंदों पर 17 रन – एक महंगी चुप्पी
जुरेल जब मैदान पर आए, उस समय Equation था – 66 रन चाहिए 66 गेंदों में। एकदम बराबर।
पर जुरेल ने चुना टुक-टुक नीति, वो भी चिन्नास्वामी में, जहां हवा में बल्ला घुमाओ तो छक्का लग सकता है।
23 गेंदों में सिर्फ 17 रन। और रन आते भी कैसे? न स्ट्राइक रोटेशन, न बाउंड्री हंट। हेटमायर दूसरी तरफ खड़े बस देख रहे थे।
और जैसे ही हेटमायर को स्ट्राइक मिली, वो भी 15 गेंदों में 12 रन बना पाए। वो हेटमायर जिन्हें “बेस्ट फिनिशर” कहा जाता था, अब खुद राजस्थान की फिनिशिंग लाइन बन गए हैं।
17वें ओवर में 162 रन – और फिर हज़लवुड की क्लास
जब 16 ओवर खत्म हुए तब स्कोर था – 162/4। 24 गेंद में चाहिए थे 43 रन।
चिन्नास्वामी में ये आसान था।
लेकिन तभी आए जोश हज़लवुड।
17वां ओवर: सिर्फ 6 रन।
18वां ओवर: 3 रन और दो विकेट – हेटमायर और जुरेल आउट।
19वां ओवर (यश दयाल): सिर्फ 4 रन।
20वां ओवर: एक औपचारिकता।
राजस्थान 194 रन पर रुक गई। 11 रन से हार। जो मैच 2 ओवर पहले तक 99% उनके नाम था।
RCB की जीत और राजस्थान की हार: एक कॉन्ट्रास्ट
RCB की जीत जितनी रणनीतिक थी, उतनी ही राजस्थान की हार भावनात्मक थी।
RCB ने ये मैच साहस, हिम्मत और भरोसे से जीता।
राजस्थान ने ये मैच शिथिलता, टुक-टुक और निष्क्रियता से गंवाया।
और ये पहली बार नहीं है।
- दिल्ली के खिलाफ: 9 रन चाहिए थे, 7 विकेट बाकी। हार गए।
- लखनऊ के खिलाफ: 6 विकेट थे, 9 रन चाहिए थे। हार गए।
- और अब RCB के खिलाफ: 2 ओवर में 18 रन चाहिए थे। फिर भी हार गए।
हर बार वही दो खिलाड़ी आखिरी ओवरों में आते हैं — और हर बार वही कहानी।
14 करोड़ का खिलाड़ी या 14 करोड़ की आफ़त?
राजस्थान ने ध्रुव जुरेल को 14 करोड़ में रिटेन किया। वहीं जोस बटलर जैसे वर्ल्ड क्लास फिनिशर को जाने दिया।
और बटलर क्या करते हैं? हर सीज़न में कम से कम 3-4 मैच अकेले जिताते हैं।
और जुरेल क्या कर रहे हैं? हर दूसरा मैच अकेले हरवा रहे हैं।
ये आंकड़े नहीं, आंसू हैं राजस्थान फैंस के। क्योंकि जो टीम 18 पॉइंट्स पर हो सकती थी, वो आज 12 पर है।
हेटमायर: 11 करोड़ का फिनिशर या डील ब्रेकर?
हेटमायर का भी हाल वही है। ये तीसरा मैच है जहां उन्होंने पारी खत्म नहीं की, टीम को खत्म कर दिया।
इनके आखिरी तीन मैच:
- 15(17)
- 12(14)
- 11(13)
11 करोड़ में खरीदे गए थे, पर पिछले तीन मैच में आउटपुट 11 रुपयों का नहीं।
और आरसीबी?
RCB के लिए तो ये सीज़न की सबसे इमोशनल जीत थी। अपने होम ग्राउंड पर पहली बार जीते। विराट कोहली ने लीड किया। पडिक्कल ने बदला लिया। और हज़लवुड ने विराट 2016 मोड में गेंदबाज़ी की।
9 मैचों में 16 विकेट – जॉइंट हाईएस्ट विकेट-टेकर।
और ये सब हुआ, राजस्थान की मेहरबानी से।
अंत में एक सवाल: क्या ध्रुव जुरेल और हेटमायर को बेंच करना चाहिए?
हाँ।
क्योंकि जब आप तीन मैच अकेले अपने फिनिशरों से हरवा चुके हों, तो बदलाव ज़रूरी है।
हो सकता है बटलर की वापसी हो, हो सकता है टॉम कोहलर-कैडमोर जैसे प्लेयर को आज़माएं।
लेकिन फिलहाल, राजस्थान को खुद से सवाल करने की ज़रूरत है —
“क्या हमारी हार विरोधी टीम की जीत से ज़्यादा, हमारी खुद की गलती है?”
एक लाइन का सार:
राजस्थान रॉयल्स की जीत की उम्मीदें, हेटमायर और जुरेल के बैटिंग के साथ वैसे ही मरती हैं, जैसे चिन्नास्वामी में गेंद हवा में उड़ती है – दिखती है, पर पकड़ में नहीं आती।
