दिल्ली कैपिटल्स बनाम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर – इस मैच से पहले हमने कहा था, “यह मैच एब्सोल्यूट सिनेमा होगा,” और जो कुछ भी हुआ, उसने इस बयान को शब्दशः साबित कर दिया। कभी दिल्ली आगे, कभी आरसीबी, फिर दिल्ली और फिर आरसीबी। हर ओवर में स्क्रिप्ट बदलती रही, हर गेंद पर जज़्बात करवट लेते रहे। लेकिन अंत में, एक छोटी सी गलती – अक्षर पटेल की एक रणनीतिक चूक – जिसने दिल्ली से मैच छीनकर आरसीबी की झोली में डाल दिया।
गलती जिसने दिल्ली से जीत छीनी
19वें ओवर में, दो ओवर में 19 रन चाहिए थे। सामने टीम डेविड जैसा विस्फोटक बल्लेबाज था। अब यहाँ मिचेल स्टार्क को गेंद देनी थी – अनुभवी, घातक, बड़े मैचों के प्लेयर। लेकिन अक्षर पटेल ने मिचेल स्टार्क की जगह मुकेश कुमार को ओवर थमा दिया। नतीजा? पहली ही गेंद नो-बॉल और चौका। फिर लगातार दो और चौके। पाँच गेंदों में 19 रन लूट लिए गए। दिल्ली के ख्वाब बिखरते चले गए। 20वां ओवर मिचेल स्टार्क को मिलना था, लेकिन 20वें ओवर की नौबत ही नहीं आई। सात गेंद रहते दिल्ली ने सरेंडर कर दिया और आरसीबी ने 6 विकेट से मैच जीत लिया।
इतिहास रचती आरसीबी – नीचे से टॉप तक का सफर
आरसीबी के फैंस के लिए यह नजारा सपने जैसा था। एक समय था जब आरसीबी हर साल पॉइंट्स टेबल के नीचे अपना नाम ढूंढती थी। लेकिन आज, 2025 में, आरसीबी टेबल टॉपर है। जी हाँ, सातवीं जीत दर्ज करते हुए विराट कोहली की सेना नंबर वन पर विराजमान हो गई है। और सबसे नीचे? चौंकाने वाला दृश्य – चेन्नई सुपर किंग्स नंबर 10 पर।
आरसीबी फैंस अब कह रहे हैं – “ये 18वां साल है। ये हमारा साल है। इस साल कप हमारा है।”
दिल्ली की चूक, आरसीबी का फिनिशिंग टच
दिल्ली ने 162 रन बनाए थे। यह स्कोर इस पिच पर कम था। 180-190 का टारगेट चाहिए था, लेकिन दिल्ली के बल्लेबाजों ने हाथ खींच लिए। और आरसीबी ने इस चुनौती को बेहद प्रोफेशनल अंदाज में चेज कर लिया। हालांकि शुरुआती झटके बड़े थे। 4 ओवर में 26 पर 3 विकेट गिर चुके थे। पडिकल, बेथल (जो विल जैक्स की जगह आए थे), दोनों सस्ते में निपट गए। लेकिन वहाँ से विराट कोहली ने एक छोर थामा और एक नाम उभरा – कुणाल पांड्या।
कुणाल पांड्या – द अनसंग हीरो
कुणाल पांड्या इस मैच के ‘मैन ऑफ द मैच’ थे। 47 गेंदों पर 73 रन – जब टीम 26/3 पर लड़खड़ा रही थी, तब! चार चौके, तीन छक्के और एक ऐसा आत्मविश्वास जो शायद ही किसी ने उनके भीतर पहले देखा हो।
पहले बॉलिंग में चार ओवर 28 रन देकर एक विकेट और फिर बल्लेबाजी में यह महाकाव्य पारी। कुणाल ने दिखा दिया कि ‘दूसरा पांड्या’ भी किसी से कम नहीं है।
12 ओवर के बाद कुणाल पांड्या का स्कोर था – 27 गेंदों पर 25 रन। लेकिन अंतिम क्षणों में उनका गियर बदलना, मैच रीड करना और टाइमिंग से खेलना, ये सब कुछ दिखाता है कि इस खिलाड़ी के भीतर कितना क्रिकेट बचा है।
विराट का कमाल और आरसीबी की ऑरेंज-पर्पल जोड़ी
विराट कोहली ने फिर से अपनी चेज मास्टरी साबित की। यह कोई पहली बार नहीं था। इस सीजन में जहाँ भी विराट ने 25+ रन बनाए हैं, आरसीबी जीती है। सातों जीतों में विराट की 25 से ऊपर की पारियां हैं। और जहाँ विराट सस्ते में आउट हुए, आरसीबी हारी। यही विराट का प्रभाव है। यही विराट का जादू है।
और इसी मैच के बाद विराट कोहली ने ऑरेंज कैप फिर से अपने सिर पर सजा ली – 430 रन। 11वीं बार आईपीएल सीजन में 400+ रन बनाकर विराट ने अपने महानता की एक और मोहर लगा दी।
वहीं, गेंदबाजी में जोश हेजलवुड ने पर्पल कैप पकड़ रखी है। सबसे ज्यादा डॉट बॉल डाल चुके हैं हेजलवुड – 100+ डॉट बॉल्स। चार ओवर में 33 रन और तीन विकेट लेकर उन्होंने एक बार फिर आरसीबी के डेथ बॉलिंग को मजबूत किया।
दिल्ली के संघर्ष, अक्षर की गलती और राहुल का हौसला
दिल्ली की तरफ से केएल राहुल ने 39 गेंदों में 41 रन बनाए। टिके, संभाले, लेकिन मैच फिनिश नहीं कर सके। मैदान पर विराट और राहुल के बीच हल्की गर्मागर्मी भी दिखी – वही जुनून, वही टेंशन जो बड़े मुकाबलों में दिखती है। पोस्ट-मैच, विराट का राहुल के पास जाकर ‘यह मेरा ग्राउंड है’ कहकर हल्की चुहलबाज़ी करना, सब कुछ इस मुकाबले को और भी ज्यादा रोचक बना गया।
अगर विराट खुद फिनिश करते, तो शायद ये ड्रामा और भी बड़े स्तर पर पहुंचता। फिर भी, इमोशंस की गर्मी पूरे मैच में महसूस हुई।
टीम डेविड – छोटा पैकेट बड़ा धमाका
टीम डेविड भी इस मैच के अनदेखे नायक रहे।
मुकेश कुमार के ओवर में पाँच गेंदों पर 19 रन मार कर उन्होंने एक हाथ से मैच छीन लिया।
पिछले कुछ मैचों में टीम डेविड ने छोटे मगर इंपैक्टफुल कैमियो खेले हैं:
- सीएसके के खिलाफ 8 गेंद 28 रन
- जीटी के खिलाफ 18 गेंद 32 रन
- डीसी के खिलाफ 20 गेंद 37 रन
- पंजाब के खिलाफ 26 गेंद 50 रन
- और अब 5 गेंद 19 रन
टीम डेविड आरसीबी के लिए वही फिनिशिंग टच बनते जा रहे हैं जो पहले एबी डीविलियर्स हुआ करते थे।
आरसीबी – ऑलराउंड परफेक्शन
आरसीबी का ये अवतार अलग है। पहले सिर्फ बैटिंग टीम मानी जाती थी। अब बैटिंग भी है, बॉलिंग भी है, फील्डिंग भी है। स्टार्क, हेजलवुड, सुयश शर्मा, कुणाल पांड्या – सब परफॉर्म कर रहे हैं।
यह टीम अब विराट+डेविलियर्स डिपेंडेंट नहीं रही। अब हर मैच में कोई नया हीरो बनकर आता है।
सुयश शर्मा भी भले विकेट कॉलम में बड़े ना दिख रहे हों, लेकिन विराट ने खुद कहा – “उसके इंपैक्ट को मत भूलिए।”
मुंबई और आरसीबी – फाइनल की ओर?
अब एक दिलचस्प बात। इस आईपीएल में आरसीबी और मुंबई दोनों टॉप पर हैं। अगर सब कुछ ऐसे ही चला, तो फाइनल में मुंबई इंडियंस बनाम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर देखने को मिल सकता है।
सोचिए क्या नजारा होगा – विराट बनाम रोहित, आरसीबी बनाम एमआई, ऑरेंज कैप बनाम ऑरेंज कैप चैलेंजर, पर्पल कैपर्स आमने सामने।
“इट्स गोना बी एब्सोल्यूट सिनेमा!”
नतीजा – आरसीबी का सुनहरा सपना जारी
तो कहानी का सार यही है –
आरसीबी ने दिल्ली को हराकर:
- पॉइंट्स टेबल में नंबर वन स्थान कब्जा किया
- ऑरेंज कैप कब्जाई (विराट कोहली)
- पर्पल कैप कब्जाई (हेजलवुड)
- बाहर के मैदानों पर लगातार 6वीं जीत दर्ज की
- और सबसे जरूरी – एक टीम के तौर पर परिपक्वता दिखाई
विराट का रन बनाना, कुणाल का उभरना, भुवी की डेथ बॉलिंग, स्टार्क की साइलेंस, सुयश की शैडो वर्क – इस सबने मिलकर आरसीबी को वो बना दिया है जो 17 सालों से बनने की कोशिश में थी – एक चैंपियन जैसी टीम।
अब सवाल बस एक – क्या ये 18वां साल, सच में आरसीबी का साल है?
क्या विराट कोहली ट्रॉफी उठाएंगे?
क्या कुणाल पांड्या का यह करिश्मा आगे भी जारी रहेगा?
क्या मुंबई और आरसीबी फाइनल में भिड़ेंगी?
आपको क्या लगता है? बताइए कमेंट सेक्शन में।
