क्रिकेट में कोइंसिडेंस बहुत देखे हैं, लेकिन 19 अप्रैल 2025 को जो नज़ारा फैंस ने देखा, वो शायद ही पहले कभी हुआ हो। दो मुल्क, दो लीग, दो स्टेडियम, दो अलग-अलग जर्सियां – लेकिन नाम एक ही – अब्दुल समद। एक भारत की ज़मीन पर आईपीएल में धमाल मचा रहा था, तो दूसरा पाकिस्तान में पीएसएल में तबाही मचा रहा था। और सबसे कमाल की बात? दोनों बल्लेबाज़ कर रहे थे सातवें नंबर पर, और दोनों ने खेली ऐसी पारी जिसे देखकर सिर्फ एक ही बात कही जा सकती है – समद फ्लावर नहीं, फायर है!
1. आईपीएल वाला समद – कश्मीर से निकलकर लखनऊ की आसमान तक
अब्दुल समद नाम नया नहीं है। सनराइज़र्स हैदराबाद के लिए जब पहली बार खेला था, तभी से सबको लगा था कि ये लड़का कुछ बड़ा करेगा। लेकिन जैसे-जैसे साल गुज़रे, वैसे-वैसे फॉर्म ऊपर-नीचे होती रही। फिर आया साल 2025। टीम बदली, फ्रेंचाइज़ी बदली, जर्सी बदली – लेकिन जो नहीं बदला वो था अब्दुल समद का इंटेंट।
19 अप्रैल को लखनऊ सुपरजाएंट्स का मुकाबला था राजस्थान रॉयल्स से। मैच बहुत क्लोज था। लखनऊ पिछड़ रही थी, टॉप ऑर्डर कुछ खास नहीं कर सका। तब बल्लेबाज़ी के लिए आया समद – और वो भी सातवें नंबर पर। शुरुआत में संघर्ष रहा – पहली पांच गेंदों पर सिर्फ 4 रन। लेकिन फिर जो हुआ, वो संदीप शर्मा के करियर की अब तक की सबसे बुरी यादों में दर्ज हो चुका होगा।
अगली पांच गेंदों पर समद ने 26 रन ठोक दिए।
- छक्का
- चौका
- दो रन
- छक्का
- फिर छक्का
राजस्थान की उम्मीदें संदीप शर्मा के ओवर में ही ध्वस्त हो गईं। रियान पराग मैच के बाद बोले – “मुझे नहीं पता हम क्यों हारे, शायद वो एक-दो ओवर थे जो मैच पलट ले गए।”
हाँ रियान, वो एक ओवर संदीप शर्मा का था, और वो एक खिलाड़ी अब्दुल समद।
इस पारी के बाद सबको समझ में आ गया कि सनराइजर्स ने जिस समद में इन्वेस्ट किया था, वो असली फल लखनऊ को मिला। इस साल के आंकड़े गवाह हैं:
| मैच | गेंदें | रन | स्ट्राइक रेट |
| पहला | 8 | 22 | 275 |
| दूसरा | 12 | 27 | 225 |
| तीसरा | 11 | 20 | 182 |
| चौथा | 11 | 30 | 273 |
| पाँचवां | 10 | 30 | 300 |
कुल: 50 गेंदों में 129 रन, स्ट्राइक रेट: 258!
लेकिन ध्यान दीजिए – 50 गेंदों में 11 छक्के, सिर्फ 2 चौके। मतलब इरादा साफ है – सीधा ऊपर, सीधा बाउंड्री पार!
2. पीएसएल वाला समद – पेशावर की सरज़मीं पर छक्कों की बारिश
अब कैमरा कट करता है पाकिस्तान की तरफ। उसी तारीख को, जब इंडिया वाले समद लखनऊ की तरफ से खेल रहे थे, उसी समय पेशावर ज़ल्मी की जर्सी में दूसरा समद मैदान में आ रहा था। अब्दुल समद नाम वही, मगर ये पाकिस्तान वाला समद था – और उसने भी वही किया जो उसके “नाम-भाई” ने किया।
14 गेंदों पर 40 रन। स्ट्राइक रेट – 285! और ये था उसका पीएसएल डेब्यू!
बाबर आज़म की टीम में उसे मौका मिला, और समद ने उस मौके को आग बना दिया।
- आकिफ जावेद को छक्का
- उबेद शाह को दो चौके, दो छक्के
- स्पिनर्स की बखिया उधेड़ी
ये आतिशबाजी रावलपिंडी के मैदान में हुई, और वहां के फैंस ने भी वही फील किया जो जयपुर में बैठे फैंस ने – भाई ये समद है, कुछ भी कर सकता है!
3. नाम एक, आग दो – ये है समद 2.0 वर्जन
अब सोचिए ज़रा – एक ही दिन, एक ही नाम, सातवां नंबर, पावर हिटिंग, छक्कों की बारिश – ये कोइंसिडेंस नहीं, ये क्रिकेट का क्लासिक सिनेमाई मोमेंट है।
अगर आप क्रिकेट लवर हैं तो ये दिन हमेशा याद रहेगा, जब समद ने दुनिया को याद दिलाया कि नाम सेम हो, तो काम भी सेम हो सकता है।
आईपीएल समद – इंडिया का फायरबॉय
- बल्लेबाज़ी का इंटेंट
- मैच विनिंग स्ट्रोक्स
- छक्कों की गूंज
पीएसएल समद – पाकिस्तान का थंडरबॉय
- पहली ही पारी में तूफान
- किसी भी गेंदबाज की नहीं छोड़ी इज़्ज़त
- स्ट्राइक रेट ऐसा जो डॉन ब्रैडमैन को भी चौंका दे
4. क्रिकेट की सीमाओं के पार – समद सेम, फीलिंग यूनिवर्सल
ये कहानी सिर्फ एक नाम की नहीं, ये नई पीढ़ी के क्रिकेट की कहानी है। उस क्रिकेट की जो अब छक्कों से परिभाषित होता है, पावर से चलता है, और इंटेंट से जीतता है।
समद चाहे भारत का हो या पाकिस्तान का, जब वो बल्ला घुमाता है तो सरहदों की लकीरें मिटती दिखती हैं।
आज सोशल मीडिया पर भी यही दिखा – लोग पूछ रहे थे:
- कौन सा समद बेहतर?
- किसका स्ट्राइक रेट ज्यादा?
- किसकी पारी ज्यादा प्रभावशाली?
लेकिन जवाब सिर्फ एक था – समद नाम ही काफी है।
5. समद का भविष्य – IPL हो या PSL, सितारे बन रहे हैं
अब सवाल ये है – क्या समद आगे जाकर टीम इंडिया और टीम पाकिस्तान के लिए भी वो रोल निभा सकते हैं जो आज एबी डिविलियर्स, रसेल, या हार्दिक निभाते हैं?
आईपीएल समद का इस सीज़न का ग्राफ बताता है कि वो सिर्फ एक फिनिशर नहीं, बल्कि एक मैच विनर है।
पीएसएल समद ने बता दिया कि अगर टीम मैनेजमेंट भरोसा करे तो वो खुद पूरा मैच पलट सकता है।
निष्कर्ष – समद 2.0 का युग शुरू हो चुका है
19 अप्रैल 2025 क्रिकेट फैंस के लिए हमेशा यादगार रहेगा।
क्यों?
क्योंकि उस दिन हमें दो अब्दुल समद मिले, जिन्होंने हमें बताया कि –
“हम फिनिशर नहीं, फिनिशिंग मूव हैं। हम छक्कों से बातें करते हैं।”
और अगली बार जब आप “अब्दुल समद” नाम देखें, तो याद रखिए – ये नाम नहीं, एक वार्निंग है – फ्लावर नहीं, फायर है।
