बड़ा गुमान था सीएसके को अपने गढ़ का और वह गढ़ अब चकनाचूर हो गया। चकनाचूर हो गया वो गढ़ जिसके बारे में सीएसके कहती थी कि यहां कोई भी हो कितने बड़े भी तोप तलवार हाथी लेकर लोग आ जाए यहां नहीं चल सकते।
यहां विराट कोहली नहीं चल सकते। यहां डिविलियर्स नहीं चल सकते। यहां कमिंस नहीं चल सकते। यहां पर युवराज नहीं चल सकते। यहां सहवाग नहीं चल सकते। यहां कोई नहीं चल सकता। यहां सिर्फ धोनी का सिक्का चलता है।
लेकिन इस साल वो सीएसके का गुरूर वो सीएसके किला ढह गया। ढह गया वो किला जिसे सालों साल सीएसके ने बनाया था। इतिहास रचा था जो सीएसके के फैंस का गुरूर था। हां जी। IPL 2025 में यूं तो कई टीमें हैं जो जीती हैं,
कई टीमें जो हारी हैं। लेकिन सीएसके गुरूर को खो कर जा रही है। वो था ना एक डायलॉग कि आप हमसे हमारी जान मांग लेते हम झेल लेते। लेकिन आपने तो हमारा गुरूर तोड़ दिया। सीएसके के फैंस यही कह रहे हैं
क्योंकि 17 सालों के बाद आरसीबी ने उनको हराया और हराया नहीं। एक तरफफ़ा मुकाबले में जलील करके भेंक दिया। एक तरफ़ा मुकाबले में। बेइज्जत किया। 15 सालों के बाद दिल्ली ने उनको हराया। इतिहास लोग बता रहे थे
कि भाई पहली यह सब हारे तब हुई थी इस देश में। जब तेंदुलकर अपने पीक पर थे। पहली बार धोनी साहब कप्तान बने उस समय हारे थे लोग। विराट विराट तब लौंडे थे। रोहित शर्मा लौंडे थे जब आए थे यहां पे तब हारे थे।
17 साल बाद आरसीबी 15 साल बाद सीएसके दिल्ली केकेआर ने इनके घर में घुसकर लोएस्ट स्कोर पर कर दिया और सब तो सब है। खत्म होते एसआरएच ने भी खत्म कर दिया। मतलब पैट कमिंस की टीम दगी हुई टीम है।
खत्म टीम है। लेकिन वो भी हंस के जा रहे हैं। कह रहे हैं हमको उम्मीद लग रही है क्योंकि यह भी तो नहीं हो रहा था। एक्चुअली जो हमने पहले आपसे कहा था कि सीएसके ऑक्शन में ही हार गई थी। अगर आप सीएसके की टीम देखोगे
तो उनके पास सब्स्टट्यूट प्लेयर के तौर पर भी जो प्लेयर हैं वो इतने बड़े प्लेयर नहीं है। कोई ऐसा प्लेयर है ही नहीं जो तोप मारने वाला हो। उनके पास रामकृष्णा है। उनके पास नागरकोटी है, ओवरटन है, अश्विन है।
ये उनके इंपैक्ट प्लेयर थे। और यकीन मानो इनमें से आधे प्लेयर ऐसे हैं जिनका क्रिकेट में कोई इंपैक्ट हमको याद नहीं है। बीते कुछ समय से या तो वह खत्म हो चुका है या अब तक शुरू ही नहीं हुआ। यह सीएसके का इंपैक्ट है।
जो 11 थे सीएसके के जो उन्होंने बनाई थी वो खत्म टीम थी। खत्म टीम बनाई थी। राहुल त्रिपाठी, विजय शंकर, दीपक हुड्डा ये इनके इंडियन बैटर थे। सीएसके भी विड्रॉल ही कर रही है। कॉन्व को विड्रॉल कर लिया,
रचिन रवि को विड्रॉल कर लिया, दीपक हुड्डा को विड्रॉल कर लिया, राहुल त्रिपाठी को विड्रॉल कर लिया। विड्रॉल कर लिया विजय शंकर को। सीएसके चार मैच अगर आप देखोगे मतलब ज्यादा मैच 2008 में हारी थी।
चार मैच 2008 में हारी थी। चार मैच 2010 में हारी थी। 12 में और चार मैच 25 में हारी घर में। लेकिन तब समस्या ये थी कि पहली बार सात में चार हारे। दूसरी बार 11 में चार हारे। तीसरी बार इस बार तो आखिरी के चार में चार हार गए।
कोई एडवांटेज ही नहीं है। पहली बार सनराइज़र्स सनराइज़र्स एट चिपक सीएसके वाले इसीलिए खुश है। चलो यार कुछ तो रिकॉर्ड बना के गए और इसकी टीम है। सीएसके ने जो अब ब्रेवेस्ट पे दांव लगाया है
या आयुष के पास गए महात्रे के पास ये सब पहले आने चाहिए थे और नहीं आए। इसी वजह से सारे किलेड है। 17 साल बाद आरसीबी वाला, 15 साल बाद दिल्ली वाला, केकेआर वाला इसी वजह से आया। खत्म हो गई
भाई साहब ये टीम लेगसी खत्म हो गई धोनी खेलेंगे नहीं खेलेंगे पता नहीं बट धोनी ने आज माना कि इस तरह के लड़के आपको मैच जीता सकते हैं ये जो आयुष खेल रहा है ये जो ब्रेविस खेल रहा है
ऐसे लड़के आपको टूर्नामेंट जिताएंगे इनमें इन्वेस्ट करो उनमें नहीं जो खत्म है देखते हैं अगले साल क्या होता है अगले साल धोनी रहते हैं नहीं रहते पता नहीं तो धोनी के लक्षण देख के लग नहीं रहा जाने वाले हैं वो ऐसा लग रहा है
वो वो एक साल और आएंगे। बट लेट्स सी दे हैव गॉट सम गुड एडवांटेजेस लाइक ब्रेविस, आयुष, कंबोज। इसके अलावा उनके पास एडवांटेज आया है नूर। ये उनके एडवांटेजेस हैं।
लेकिन सबसे पहले तो फील्डिंग करना सिखाओ यार। 18 कैच ड्रॉप किए। चलो फॉर्म तो अपनी जहां पर है। 18 कैच कौन ड्रॉप करता है? इसी सब के चक्कर में गुरूर टूटा है। सीएसके का धोनी का। धोनी का 400वां टी20 मैच है जो हारे है यहां
