दुनिया फिनिशर ढूंढती है, राजस्थान ने वो खिलाड़ी ढूंढा जो टीम को ही फिनिश कर दे।”
IPL 2025 के इस सीज़न में जब हर टीम स्ट्रॉन्ग फिनिशिंग यूनिट बना रही थी, तब राजस्थान रॉयल्स ने एक अलग ही रिस्क लिया। उन्होंने जोस बटलर को जाने दिया, और 14 करोड़ में रिटेन किया ध्रुव जुड़ेल को — एक युवा, होनहार बल्लेबाज़ जिसे शायद एक या दो सीज़न और चाहिए थे।
लेकिन राजस्थान ने क्या किया? उसे टीम के फिनिशर की कुर्सी पर बैठा दिया।
और फिर शुरू हुई तीन मैचों की वो त्रासदी, जो अब सोशल मीडिया पर एक मीम नहीं, एक गंभीर क्रिकेटीय सवाल बन चुकी है।
एपिसोड 1: दिल्ली कैपिटल्स बनाम राजस्थान रॉयल्स – सुपर ओवर की मूर्खता
मौका था जीत का।
9 रन चाहिए थे।
7 विकेट बाकी थे।
गेंदबाज़ी की कमज़ोर यूनिट दिल्ली के पास थी।
लेकिन बल्लेबाज़ी करने आए ध्रुव जुड़ेल।
और फिर क्या हुआ?
सुपर ओवर।
मतलब जहाँ से राजस्थान को 2 पॉइंट मिलते, वहाँ 1 पॉइंट के लिए लड़ना पड़ा। और जिम्मेदार कौन?
ध्रुव जुड़ेल, जिन्होंने बैटिंग की स्पीड कम कर दी, स्ट्राइक रोटेट नहीं किया, और आखिरी ओवर में 9 रन भी नहीं बना सके।
एपिसोड 2: लखनऊ सुपर जायंट्स बनाम राजस्थान – ना सुपर ओवर, ना पॉइंट
फिर आया अगला मैच।
विपक्ष था लखनऊ।
स्थिति वही — आसान रन चेज़, विकेट्स इन हैंड, रन रेट काबू में।
और जुड़ेल ने क्या किया?
इस बार सुपर ओवर तक नहीं पहुंचे, डायरेक्ट मैच हरवा दिया।
पारी में न स्ट्राइक रोटेट, न हिटिंग की कोई कोशिश, सिर्फ एक सी चीज़ – प्रेशर बनाना।
लखनऊ के गेंदबाज़ थक चुके थे, राजस्थान के टॉप ऑर्डर ने गेम सेट कर दिया था। पर फिर भी, ध्रुव जुड़ेल ने वो किया जो कोई विपक्षी टीम भी नहीं कर पाई थी – राजस्थान रॉयल्स को खुद की ही तलवार से गिरा दिया।
एपिसोड 3: चिन्नास्वामी में विराट को फिनिश नहीं कर पाए, ध्रुव ने राजस्थान को कर दिया
और अब RCB बनाम RR का वो मैच, जिसने ध्रुव जुड़ेल को गोट (G.O.A.T – Greatest Of All Tragedies) बना दिया।
205 रन का टारगेट।
9 ओवर में 110 रन।
यशस्वी जयसवाल ने आतिशबाज़ी कर दी।
रियान पराग ने इंजन को चालू कर दिया।
और फिर एंट्री हुई ध्रुव ‘टुक टुक’ जुड़ेल की।
जिन्होंने:
- 23 गेंदों पर 17 रन बनाए
- स्ट्राइक छुपा कर रखी
- हेटमायर जैसे फिनिशर को टाइम ही नहीं दिया
- और 18वें ओवर में दोनों आउट हो गए
नतीजा: राजस्थान 194 पर ऑलआउट।
हार: 11 रन से।
वजह: ध्रुव जुड़ेल, जो शायद बैंगलोर के सीक्रेट एजेंट लगते हैं।
“14 करोड़ में टीम फिनिशर खरीदी थी, पर टीम फिनिश हो गई”
सोचिए, जब IPL टीम्स अपने बेस्ट फिनिशर को 14 करोड़ में रिटेन करती हैं, तो उनका टारगेट होता है – कम से कम 3-4 मैच अकेले जीताने वाला खिलाड़ी।
पर ध्रुव जुड़ेल?
- 3 मैचों में राजस्थान अकेले उनके कारण हार गई
- स्ट्राइक रेट 100 से नीचे
- रन कम, डॉट बॉल्स ज़्यादा
- और मोमेंटम – पूरी तरह sabotaged
अब आप खुद सोचिए — राजस्थान ने 14 करोड़ में क्या खरीदा?
जवाब है: “A match loser in the disguise of a finisher.”
RCB का कमबैक – लेकिन ‘मैन ऑफ द मैच’ तो जुड़ेल ही थे
विराट कोहली ने हाफ सेंचुरी मारी।
पडिक्कल ने पुरानी टीम से बदला लिया।
हज़लवुड ने डेथ ओवर में जादू दिखाया।
RCB ने पहली बार होम में मैच जीता।
पर असली जीत ध्रुव जुड़ेल की थी।
उन्होंने ही वो किया जो RCB पिछले 7 मैचों में नहीं कर पाई थी – राजस्थान से मैच छीन लिया।
सोशल मीडिया का कहर – “ध्रुव जुड़ेल आरसीबी के लीजेंड हैं”
- “RCB की जर्सी अंदर पहनी थी क्या?”
- “बटलर को छोड़कर इसको रखा, ये कोई सीरीयस मूव था?”
- “ध्रुव जुड़ेल, फुल टाइम RCB ब्रांड एंबेसडर!”
- “पर्पल कैप – जोश हज़लवुड को, ब्लैक कैप – जुड़ेल को!”
मीम्स वायरल हो रहे हैं। पर कहीं न कहीं, राजस्थान फैंस का दिल सच में टूटा है।
बटलर को क्यों छोड़ा? हेटमायर क्या कर रहे हैं?
ये सवाल अब गंभीर हैं:
- बटलर को टीम ने जाने दिया – IPL का एकमात्र 800+ रन बनाने वाला विदेशी
- हेटमायर जो 11 करोड़ में हैं, वो भी जुड़ेल से बेहतर नहीं कर रहे — 15(17), 12(14), 11(13) उनके पिछले तीन स्कोर हैं
राजस्थान की फिनिशिंग यूनिट फेल हो चुकी है। और इसकी सबसे बड़ी मिसाल – ध्रुव जुड़ेल।
राजस्थान को करना क्या चाहिए?
- ध्रुव जुड़ेल को बेंच करो – चाहे नाम बड़ा हो, पर परफॉर्मेंस छोटी है
- बटलर की वापसी करवाओ – या फिर नया विदेशी फिनिशर लाओ
- हेटमायर की जगह किसी युवा को मौका दो – TKC या डोनोवन फेरेरा जैसे
IPL एक हार या दो हार से नहीं बदलता, लेकिन जब तीन मैच एक ही प्लेयर की वजह से जा चुके हों, तो बदलाव अनिवार्य है।
अंत में एक लाइन:
“हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं, लेकिन जीत कर हराने वाले को ध्रुव जुड़ेल कहते हैं।”
