- मिर्ज़ा ग़ालिब की ये पंक्तियाँ शायद ही कभी इतनी सटीक किसी क्रिकेट टीम पर लागू हुई हों जितनी आज की तारीख़ में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) पर होती हैं।
2025 का IPL सीज़न — वो सीज़न जिसने माही के युग का आखिरी क़िस्सा शायद लिख डाला। पहली बार चेन्नई सुपर किंग्स इतने बुरी तरह टूटी, इतनी बदहवास दिखी और इतनी जल्दी बेआबरू होकर टूर्नामेंट से बाहर हुई। न वो पुरानी रचना थी, न वो पीली जर्सी की चमक, न वो जादू जिसने पिछले सालों में धोनी को मसीहा बना रखा था।
धोनी युग का सबसे शर्मनाक अंत?
IPL 2025 के आधिकारिक आंकड़े गवाही देते हैं कि CSK की ये अब तक की सबसे शर्मनाक विदाई रही:
- पहली बार CSK प्लेऑफ़ से इतनी जल्दी बाहर हुई।
- पहली बार CSK ने घरेलू मैदान चेपॉक में लगातार पाँच मैच हारे।
- और शायद पहली बार ऐसा हुआ कि CSK के कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ जैसे ‘इनविज़िबल लीडर’ बनकर उभरे, जिनकी मौजूदगी भी टीम को दिशा न दे सकी।
इस टीम की हार किसी एक गेंद या एक दिन की कहानी नहीं थी। ये हार धीरे-धीरे, हर सेलेक्शन, हर ओवर, हर पारी और हर रणनीति में बोई गई थी। CSK इस बार एक बदली हुई टीम नहीं, बल्कि एक खोई हुई पहचान बन चुकी थी।
1. चयन की तबाही: जब शुरुआत ही गलत हो
IPL टीमों के बर्बाद होने की सबसे तेज़ और सरल वजह होती है गलत चयन। CSK इस बार उसी दलदल में गिरे, जहां से वे अक्सर बच जाते थे।
दीपक हुड्डा, राहुल त्रिपाठी, विजय शंकर — इन तीनों खिलाड़ियों को देखकर कोई नहीं कह सकता कि ये T20 मैच जिताने लायक फॉर्म में हैं। फिर भी इन्हें बार-बार मौका दिया गया, जैसे चेन्नई ने पूरे भारत का ‘मिडिल ऑर्डर रिटायरमेंट होम’ खोल दिया हो।
- दीपक हुड्डा:
- 2023 में बनाए थे सिर्फ 84 रन।
- 2024 में 145 रन।
- इस बार 8 पारियों में कुल 47 रन।
- स्कोर: 5, 0, 11, 3, 4, 0, 22
- फिर भी खेलते रहे, मानो कोई नई उम्मीद हों।
- राहुल त्रिपाठी:
- 2023 में 13 मैच – 273 रन
- 2024 में 6 मैच – 165 रन
- 2025 में 5 मैच – 55 रन
- रन तो छोड़िए, आत्मविश्वास भी गायब था।
- विजय शंकर: एक ऐसा नाम जो हर IPL टीम को साल में कम से कम एक बार पछताने पर मजबूर कर देता है। इस बार भी कुछ अलग नहीं हुआ। ‘3D खिलाड़ी’ के नाम पर मिला था प्लेन टिकट, लेकिन मैदान में दो ही डायमेंशन दिखे: स्लो स्ट्राइक रेट और डगआउट की लंबी यात्राएँ।
2. पुराने हीरो अब बोझ बन गए
CSK हमेशा से अनुभव को तवज्जो देती आई है, लेकिन इस बार वो अनुभव गति अवरोधक बन गया।
- रचिन रवींद्र: टेस्ट और वनडे में चमकने वाले इस खिलाड़ी का T20 रिकॉर्ड पहले से संदिग्ध था। IPL की आंधी में वो उड़ते चले गए।
- डेवोन कॉनवे: जब साथ में कोई स्ट्राइकिंग बैटर न हो, तब उनकी टेक्नीक T20 के लिए अंडरपावर दिखती है।
- शिवम दुबे: पिछले सीजन के हीरो, इस बार सीमर्स के आगे फ्लॉप।
- रविंद्र जडेजा: कभी मैच विनर, इस बार ऑलराउंडर नहीं, ऑलराउंड शून्य निकले।
CSK की ताकत माने जाने वाले खिलाड़ी जैसे पथिराना और नूर अहमद भी इस बार ऑफ-कलर दिखे:
- पथिराना:
- पंजाब के खिलाफ: 4 ओवर – 52 रन
- MI के खिलाफ: 1 ओवर 3 गेंद – 34 रन
- SRH के खिलाफ: 4 ओवर – 27 रन
- सीजन टैली: 8 मैच – 9 विकेट – इकॉनमी: 10+
- नूर अहमद:
- शुरुआत में कोहिनूर थे: 4/18, 3/36
- लेकिन अंत तक आकर: 1/39, 2/42
- मतलब धीरे-धीरे सीज़न की सबसे बड़ी एक्सपोज़र स्टोरी बन गए।
3. कप्तानी का संकट: ऋतुराज ‘गायबकवाड़’
धोनी के उत्तराधिकारी ऋतुराज गायकवाड़ को कप्तानी सौंपी गई — उम्मीद थी कि ‘गायकवाड़ की गाथा’ लिखी जाएगी। लेकिन लिखी गई तो बस एक चुप्पी की किताब।
ऋतुराज का नेतृत्व, न रणनीति में दिखा, न फील्ड पर। कप्तान होते हुए भी ऐसा लगा जैसे किसी रोबोट ने टीम को ऑटो-पायलट पर डाल दिया हो।
जब टीम बैकफुट पर थी, तब ना कोई इनपुट, ना कोई आक्रामक मूव, ना मैदान पर जोश। और जब सामने से धूल उड़ रही हो, तब कप्तान का अदृश्य होना टीम को सिर्फ और नीचे ले जाता है।
4. चेपॉक की हार, वो भी पाँच बार!
चेपॉक, जहां टीमों के सपने दम तोड़ते हैं, वही इस बार CSK के लिए मौत का कुआँ बन गया।
- लगातार पाँच घरेलू हार — RCB, DC, KKR, SRH, और फिर PBKS से।
- वह ग्राउंड जो CSK का अभेद्य किला होता था, इस बार खुद उनकी कब्र बन गया।
2008 और 2012 में भी CSK घरेलू हार झेल चुकी थी, लेकिन इतनी बेरहमी से नहीं। इस बार वो हार नहीं, संदेह और शर्म थी — कि क्या वाकई टीम अब पुरानी रह गई है?
5. आखिरी अध्याय: माही की विदाई?
धोनी इस बार खिलाड़ी कम, बुझी हुई शमा ज़्यादा लगे। उनके हाथों में बल्ला तो था, पर उसमें वो आत्मा नहीं दिखी जो कभी हेलीकॉप्टर से उड़ती थी।
हर कोई जानता है कि ये IPL शायद उनका आखिरी था, लेकिन जिस तरह से टीम टूटी, फैंस को एक ‘राजसी विदाई’ की उम्मीद थी। मिला तो एक खामोश अंत, एक ऐसा अंत जिसमें धोनी फील्ड पर थे, लेकिन दिलों से धीरे-धीरे उतरते गए।
CSK की तीन सबसे बड़ी कमज़ोरियाँ
1. बैटिंग:
ना ओपनर चले, ना मिडल ऑर्डर। ना स्ट्राइक रोटेशन, ना स्ट्राइकर्स।
2. बॉलिंग:
पथिराना-नूर बिखरे, जडेजा-शार्दुल आउटडेटेड।
3. ऑलराउंडर:
नाम बड़े, दर्शन छोटे। कोई भी गेमचेंजर नहीं बना।
क्या भविष्य बचा है CSK का?
इस IPL के बाद एक सवाल हर फैन के मन में गूंज रहा है — क्या ये CSK का अंत है जैसा हमने जाना था?
धोनी के बिना CSK वैसी नहीं दिखेगी जैसी थी। और अगर यही चयन, यही रणनीति, और यही थकान बनी रही — तो CSK IPL की एक बीती हुई कहानी बनकर रह जाएगी।
एक आखिरी बात: इतिहास के पन्नों में धोनी
धोनी को IPL में याद किया जाएगा — ट्रॉफियों के लिए, हेलीकॉप्टर शॉट्स के लिए, शांत नेतृत्व के लिए। लेकिन इस आखिरी सीज़न को शायद वो खुद भी याद नहीं रखना चाहेंगे।
कभी-कभी, राजाओं को भी चुपचाप मंच से उतरना पड़ता है, जब उनके सिपाही हार चुके होते हैं, जब महल की दीवारें गिर चुकी होती हैं।
और शायद ये वही दिन था।
CSK का IPL 2025 एक हार नहीं था — ये एक युग का अंत था। वो युग जिसमें धोनी भगवान जैसे पूजे जाते थे, रवींद्र जडेजा को सर कहा जाता था, और हर सीजन में चेन्नई को ट्रॉफी की दावेदार माना जाता था।
लेकिन अब वक्त है एक नई कहानी लिखने का। नई टीम, नई सोच और नई कप्तानी की।
क्योंकि…
“जब तक सूरज चाँद रहेगा, धोनी तेरा नाम रहेगा”
…लेकिन IPL ट्रॉफी जीतने के लिए सिर्फ नाम नहीं, फॉर्म और फ़ायदा चाहिए — और वो अब CSK के पास नहीं है।
