राजस्थान रॉयल्स: जीत के जबड़े से हार की कहानी – एक और ट्रेजेडी

“अगर हार कर जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं, तो जीतकर हारने वालों को राजस्थान रॉयल्स कहेंगे।”

क्रिकेट की दुनिया में कुछ हारें होती हैं, जो आपको लंबे समय तक सता जाती हैं। कुछ हारें ऐसी होती हैं जो आपको बेचैन कर देती हैं, और फिर आती हैं राजस्थान रॉयल्स की हार… जो आपको टूटा हुआ छोड़ देती हैं। लखनऊ सुपर जाएंट्स के खिलाफ जो हुआ, वो सिर्फ एक मैच नहीं था, वो एक ट्रॉमा था।

18 गेंदों पर 25 रन चाहिए थे। क्रीज़ पर यशस्वी जैसवाल और रियान पराग – दोनों सेटल, दोनों इन फॉर्म। और जीत? वो तो पक्की दिख रही थी। ESPN हो या क्रिकबज़, हर जगह जीत का प्रतिशत 90% से ऊपर था। लेकिन फिर क्या हुआ? वही जो राजस्थान के साथ बार-बार होता है – हार।

कट कॉपी पेस्ट स्क्रिप्ट: दोहराई गई त्रासदी

एक मैच पहले दिल्ली के खिलाफ भी यही स्क्रिप्ट थी – शुरुआत धमाकेदार, मिडल में पेस, एंड में विकेट्स और फिर हार। जैसवाल का अर्धशतक, पराग की आक्रामक शुरुआत, हेटमायर-जुड़ेल का आना और सब कुछ बर्बाद कर देना। हार।

लखनऊ के खिलाफ भी वही हुआ। और ये कोई साधारण हार नहीं थी – ये हार शर्मनाक थी, चुभने वाली थी, और सबसे बड़ी बात – “चोक” वाली थी।

ध्रुव जुड़ेल – 14 करोड़ की चूक?

राजस्थान ने आईपीएल ऑक्शन में जो फैसले लिए, अब उनके नतीजे सामने आ रहे हैं। जोस बटलर? रिलीज़। प्रसिद्ध कृष्णा? रिलीज़। युजवेंद्र चहल? रिलीज़। और किसे रिटेन किया? ध्रुव जुड़ेल – 14 करोड़ में।

अब आप सोचिए, आखिरी ओवर में 9 रन चाहिए और स्ट्राइक पर कौन है? ध्रुव जुड़ेल। पहली बॉल पर सिंगल। फिर हेटमायर आउट। फिर जुड़ेल स्ट्राइक पर आए और… क्या किया? कुछ नहीं। छह गेंद पर पांच रन। आईपीएल का सबसे महंगा युवा बल्लेबाज, और इतनी बेशर्मी से आउट हो रहा है जैसे नेट्स में खेल रहा हो।

जुड़ेल को देख कर फैंस सोच रहे हैं – क्या यही राजस्थान रॉयल्स का भविष्य है?

आवेश खान – स्टार्क 2.0

लेकिन जहां एक तरफ राजस्थान बिखर रही थी, वहीं दूसरी तरफ आवेश खान सितारा बनकर उभरे। 18वां ओवर – सिर्फ 5 रन। 20वां ओवर – सिर्फ 6 रन। आखिरी दो ओवर में 11 रन डिफेंड करना, वो भी हेटमायर जैसे हिटर के सामने? कमाल है यार।

मुंबई के खिलाफ भी उन्होंने यही किया था, और आज फिर दोहरा दिया। आवेश खान ने अपने परफॉर्मेंस से बता दिया – “मैं हूं डेथ ओवर का बॉस।”

रियान पराग – कहां गलती हो गई?

मैच के बाद जब रियान पराग ने कहा, “समझ नहीं आ रहा कि कहां गलती हो गई,” तो उनके चेहरे की मायूसी सब कुछ कह गई। 18 ओवर तक जीत उनकी मुट्ठी में थी, फिर दो ओवरों में सब उड़ गया।

बैक टू बैक हार, और वो भी क्लोज मैच में – मानसिक तौर पर तोड़ कर रख देता है। रियान ने 19वें ओवर में आउट होकर मैच गंवा दिया। और खुद को ज़िम्मेदार माना। जो समझ है, वही सबसे बड़ी बात है, लेकिन अब वक्त है कुछ करने का।

जयसवाल – एकमात्र योद्धा

यशस्वी जयसवाल, तुमने किया सब कुछ। 52 गेंदों में 74 रन। शानदार फॉर्म – पिछले पांच मैच में 67, 75, 51, 74… और फिर भी टीम हार रही है।

राजस्थान रॉयल्स की हर हार में एक जयसवाल का शतक या अर्धशतक छुपा होता है। लेकिन कोई नहीं है जो उस मेहनत को जीत में बदल सके। संजू सैमसन? गायब। हेटमायर? सिर्फ नाम का फिनिशर। जुड़ेल? महंगा मज़ाक।

सबसे बुरा – एक 14 साल का बच्चा भी बेहतर निकला

वैभव सूर्यवंशी – 14 साल 23 दिन का ये बच्चा डेब्यू करता है, और तीसरी गेंद पर चौका ठोक देता है। फिर 20 गेंदों में 34 रन बनाता है। ज़रा सोचिए – एक बच्चा जो अपनी उम्र से बड़ा खेलता है, और वहीं 14 करोड़ का खिलाड़ी छह गेंदों में पांच रन बनाता है। क्या तुलना है!

फैंस का दिल सच में टूट गया। वैभव रोते हुए वापस लौटे, क्योंकि डेब्यू मैच हार गए। लेकिन जुड़ेल हँसते दिखे, क्योंकि उन्हें शायद फर्क ही नहीं पड़ता।

ऋषभ पंत – फिर बचे, पर आवेश की बदौलत

अगर ये मैच राजस्थान जीत जाता, तो आज सारे सवाल ऋषभ पंत पर होते। एक आसान रन आउट छोड़ा – बॉल पकड़ने की जगह ग्लव्स से स्टंप पे मारा। पर आवेश खान ने उन्हें बचा लिया।

ऋषभ पंत का परफॉर्मेंस – तीन गेंद पर तीन रन, और स्टंपिंग रन आउट दोनों छोड़ दिए। लगातार दूसरे मैच में फ्लॉप। लेकिन जब टीम जीत जाए, तो कोई नहीं पूछता।

लखनऊ की नई जान – अब्दुल समद और एडन माकरम

अब्दुल समद 2.0 इस सीज़न का एक बड़ा रिवीलेशन हैं। आखिरी में आते हैं, सिक्स मारते हैं, मैच पलट देते हैं। आज 10 गेंद में 30 रन। पहले के मैच में 8 गेंद 22, फिर 12 गेंद 27, और अब 11 गेंद 30। क्लच खिलाड़ी।

माकरम ने 66 रन की पारी खेली – शांत और स्थिर। और बदोनी ने भी जिम्मेदारी से बल्लेबाजी की – 50 रन। एक टीम का बैकबोन वही होता है जो आखिरी ओवर तक मैच पकड़ कर रखे – लखनऊ ने किया, राजस्थान नहीं कर सकी।

राजस्थान की हार – नियति या नालायकी?

एक वक्त था जब राजस्थान पॉइंट्स टेबल में टॉप पर थी। अब देखो – चार लगातार हार। और वो भी कैसे? एक जैसे मैच, एक जैसी स्क्रिप्ट, एक जैसे फैसले – और एक जैसा अंजाम।

क्या ये नियति है? या नालायकी?

फिक्सिंग का शक इसलिए भी आता है, क्योंकि कोई टीम इतने “कॉपी पेस्ट” अंदाज़ में लगातार दो मैच नहीं हार सकती। 18 गेंद पर 25 रन… टी20 क्रिकेट में किसी भी दिन बनने वाले रन हैं। और आपके पास 8 विकेट थे!

सवाल यही है – राजस्थान रॉयल्स को हो क्या गया है?

राजस्थान को अब क्वालीफायर की दौड़ से बाहर मानो

गुजरात के 10 पॉइंट्स, पंजाब के 10, दिल्ली और लखनऊ के भी 10 – चार टीमें पहले ही आगे बढ़ चुकी हैं। राजस्थान अगर यही फॉर्म लेकर चलती रही, तो वो क्वालीफायर नहीं, क्वारंटीन में चली जाएगी।

फैंस पूछ रहे हैं – क्या ये टीम वाकई क्वालीफायर की हकदार है?

राजस्थान रॉयल्स को अब आत्मनिरीक्षण की सख्त ज़रूरत है। हर खिलाड़ी को समझना होगा कि सिर्फ नाम से नहीं, खेल से जीत मिलती है। ध्रुव जुड़ेल को छोड़िए, और वैभव सूर्यवंशी जैसे प्लेयर्स पर भरोसा कीजिए। और सबसे जरूरी – जो खिलाड़ी चला रहे हैं, उन्हें कप्तानी की कुर्सी छोड़कर जिम्मेदारी लेनी होगी।

जब तक राजस्थान हार से सबक नहीं लेगा, तब तक ये टीम “न्यू जोकर ऑफ आईपीएल” कहलाती रहेगी।

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