“हर राजा का एक आखिरी युद्ध होता है… और हर युग का एक अंत।”

आईपीएल 2025 के इस पड़ाव पर अगर कोई एक टीम सबसे ज़्यादा भावनात्मक चर्चा का विषय बनी है, तो वह है – चेन्नई सुपर किंग्स। और जब सीएसके की बात होती है, तो नाम अपने-आप जुड़ जाता है – महेंद्र सिंह धोनी। ये वही धोनी हैं जिनकी कप्तानी में पांच खिताब जीते गए, जिन्होंने चेन्नई की सड़कों पर लोगों को पीला रंग पहनना सिखाया, जिनकी वजह से स्टैंड्स “थाला थाला” के नारों से गूंजते रहे। पर इस बार, सब कुछ फीका सा लग रहा है। सवाल ये नहीं कि धोनी रिटायर होंगे या नहीं। सवाल ये है – क्या धोनी मन से हार मान चुके हैं? क्या सीएसके की कहानी खत्म हो गई है?

बॉम्बे ब्लोअर: जब मुंबई ने सब कुछ छीन लिया

इंडियन प्रीमियर लीग में सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता – सीएसके बनाम मुंबई इंडियंस। और जब इस सीज़न में मुंबई ने सीएसके को नौ विकेट से रौंदा, तो सिर्फ़ एक मैच नहीं हारा था चेन्नई… शायद एक युग हार गया था।

पथिराना, जो पिछले दो सालों में धोनी के सबसे भरोसेमंद योद्धा रहे, इस बार 10 गेंदों में 34 रन दे गए। खलील अहमद को भी पीटा गया, नूर अहमद की स्पिन गूंज नहीं बन सकी। सामने थे – सूर्यकुमार यादव और रोहित शर्मा, जैसे अपनी खोई चमक वापस पा चुके हों। इस मैच ने धोनी और फ्लेमिंग की टीम के सारे प्लान्स को चीर कर रख दिया।

पर असली झटका मैदान पर नहीं, मैच के बाद आया – जब धोनी बोले:

“हमें भावनाओं में नहीं बहना चाहिए। अगर हम क्वालिफाई नहीं करते, तो अगली सीज़न के लिए 11 पर काम शुरू करेंगे।”

क्या? धोनी, जो हमेशा प्लेऑफ्स की लड़ाई में रहते थे, इस बार अगला साल सोचने लगे हैं? क्या ये स्वीकारोक्ति है कि 2025 में सीएसके की कहानी खत्म हो चुकी है?

धोनी का वो बयान – हार की स्वीकृति या भविष्य की योजना?

धोनी कभी सीधे बात नहीं करते। वो हमेशा संकेतों में बात करते हैं। और इस बार भी जब उन्होंने “अगले साल की 11” का ज़िक्र किया, तो क्रिकेट पंडितों और फैंस ने इसे दो हिस्सों में बांटा:

  1. धोनी अगली साल भी खेलेंगे, और भविष्य के लिए तैयारी शुरू कर रहे हैं।
  2. धोनी समझ चुके हैं कि इस साल कुछ नहीं बचा। और यह उनका आखिरी डांस था।

दोनों ही बातें सही लगती हैं। पर जो चीज़ पक्की हो चुकी है – वह यह कि धोनी को इस साल की टीम पर भरोसा नहीं था। और शायद उन्होंने अब हार मान ली है।

सीएसके की टीम: जो नहीं चल पाई

अब बात करते हैं टीम की। देखिए, जीतने के लिए सिर्फ़ अनुभव नहीं चाहिए – एक्स फैक्टर चाहिए। और इस साल की सीएसके टीम में वो गायब था।

  • राहुल त्रिपाठी, विजय शंकर, दीपक हुड्डा – तीनों खिलाड़ी ऐसे जो कई सालों से आईपीएल में घूम रहे हैं, लेकिन मैच विनर नहीं बन पाए।
  • डेवोन कॉन्वे – क्लास खिलाड़ी, पर तेज़ शुरुआत देने में नाकाम। उन्हें दूसरे छोर से सपोर्ट चाहिए था, जो मिला नहीं।
  • रविंद्र जडेजा – कभी-कभार चमकते हैं, पर वो 2021 वाला फॉर्म नहीं दिखा पाए।
  • रचिन रविंद्र – कागज़ पर बहुत अच्छे, पर मैदान पर कुछ खास नहीं कर सके।
  • ऋतुराज गायकवाड़ – चोटिल होकर बाहर।
  • धोनी – अब फिनिशर नहीं रह गए। उन्होंने खुद को नंबर 8-9 पर रखा, जिससे ये साफ हो गया कि वह खुद को फिनिशर नहीं मानते।

अगर आपकी टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ 43 साल के धोनी हों, तो इसका मतलब यही होता है कि आपकी युवा ब्रिगेड फेल हो चुकी है।

पॉइंट्स टेबल और खत्म होती उम्मीदें

आईपीएल 2025 के 8 मुकाबलों में सीएसके ने सिर्फ़ दो जीत दर्ज की। और वो भी जब शुरुआती जोश था। अब पॉइंट्स टेबल में 4 पॉइंट्स और 10वें पायदान पर लुढ़की यह टीम प्लेऑफ की रेस से लगभग बाहर हो चुकी है।

अब अगर, और सिर्फ अगर, सीएसके अपने बाकी के छह मैच जीत जाए तो उसके 16 पॉइंट हो सकते हैं। पर…

  1. इतनी लगातार जीत इस टीम से संभव नहीं दिखती।
  2. इस साल 16 पर भी क्वालीफाई होना मुश्किल लग रहा है क्योंकि कई टीमें पहले से 10 पॉइंट पर हैं।

मतलब कहानी लॉजिकली भी खत्म।

अंदर से टूटता हुआ साम्राज्य

धोनी का सीएसके सिर्फ एक टीम नहीं थी, वह एक संस्कृति थी। अनुशासन, शांति, आत्मविश्वास – सब कुछ सीएसके की पहचान थी। पर इस बार टीम अंदर से ही दरकती दिखी। मैच दर मैच, कप्तान (ऋतुराज), सीनियर (जडेजा), मैनेजमेंट (फ्लेमिंग), और धोनी – किसी में वह “जूनून” नहीं दिखा।

2023 की तरह जब धोनी लंगड़ाते हुए खेलते थे, और फिर भी चेन्नई को चैंपियन बनाते थे – वैसी कहानी अब दोहराई नहीं जा सकती। क्योंकि तब आसपास थे – कॉन्वे, गायकवाड़, मोइन, ब्रावो जैसे भरोसेमंद योद्धा।

नए सूरज की तलाश – आयुष महात्रे और शेख रशीद

इस सीज़न में एक चीज़ जो सीएसके ने सीख ली – वह है “अब पुराने नामों पर भरोसा नहीं कर सकते”। इसलिए शेख रशीद और आयुष महात्रे जैसे खिलाड़ियों को मैदान पर उतारा गया।

आयुष – सिर्फ 17 साल का है। लेकिन वह तीन नंबर पर उतरा। इसका मतलब साफ है – सीएसके अब भविष्य की टीम बना रहा है।

शायद यही वजह है कि धोनी भी अब “गाइड” की भूमिका निभा सकते हैं। फील्ड पर ना सही, डगआउट में एक कोच या मेंटर के रूप में

क्या ये धोनी का आखिरी सीज़न है?

यह वो सवाल है, जिसका जवाब सिर्फ़ और सिर्फ़ धोनी के दिल में छिपा है। लेकिन संकेत साफ हैं:

  • टीम अब प्लेऑफ रेस से बाहर है।
  • धोनी खुद युवा प्लेयर्स को उतार रहे हैं।
  • उनके बयान अब टीम बिल्डिंग की बात कर रहे हैं, न कि जीतने की।

और सबसे अहम – भीड़ अब भी हर जगह “थाला” चिल्ला रही है, पर थाला अब मुस्कुराकर इशारा कर रहे हैं कि ये सफर खत्म होने वाला है।

रिटायरमेंट की घड़ी? या नया रोल?

देखिए, धोनी अगर 2026 में भी खेलते हैं, तो वह चौंकाने वाला नहीं होगा – क्योंकि वो धोनी हैं। लेकिन ये भी सच है कि वह इस सीज़न में न हिट मार पाए, न स्टंपिंग से मैच पलट पाए, न कप्तानी की जरूरत पड़ी। यानी उनका क्रिकेट रोल अब लगभग पूरा हो चुका है।

अब शायद वक्त है कि वह मेंटर बनें, डायरेक्टर बनें, और एक नई टीम को तैयार करें।

सीएसके का अगला चेहरा – कौन होगा उत्तराधिकारी?

ऋतुराज गायकवाड़ अभी कप्तान हैं, लेकिन वह अभी तक उस स्तर पर नहीं पहुंचे हैं जहां धोनी थे। उन्हें अभी और समय चाहिए।

  • क्या जडेजा लीड करेंगे? नहीं, अतीत के अनुभवों से यह साफ है।
  • क्या कोई बाहर से कप्तान लाया जाएगा?
  • या क्या आयुष महात्रे और शेख रशीद जैसे युवा भविष्य के थाला बनेंगे?

ये सवाल अगले सीज़न में तय होंगे।


अंत में…

सीएसके 2025 में खत्म हो चुकी है। आंकड़े यही कहते हैं। पर क्या धोनी भी इस सफर से “लॉग आउट” कर चुके हैं? शायद हां। शायद नहीं।

पर एक बात पक्की है – अब वह जीत नहीं, उत्तराधिकार की तैयारी में हैं।

चेन्नई अब एक नई शुरुआत करेगी – और शायद अगली बार, जब “थाला” शब्द स्टैंड्स में गूंजेगा, तो धोनी पवेलियन में खड़े होंगे… सिर झुकाकर नहीं, सिर ऊंचा करके… क्योंकि उन्होंने एक और युद्ध नहीं, बल्कि एक नई पीढ़ी तैयार की होगी।

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