“No More India vs Pakistan: क्रिकेट नहीं, अब साइलेंस है”

प्रस्तावना: एक राइवलरी की आखिरी सांस

कभी लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम से लेकर कोलकाता के ईडन गार्डन्स तक, भारत-पाकिस्तान का क्रिकेट मैच केवल खेल नहीं होता था—वो युद्ध के बिना जंग होता था। हर चौका एक बयान होता, हर विकेट एक नारा। पर अब, इतिहास ने एक बार फिर अपने घाव दिखाए हैं, और शायद यह सबसे गहरा घाव है—अब भारत और पाकिस्तान क्रिकेट में आमने-सामने नहीं होंगे


अध्याय 1: 2008—एक तारीख जिसने क्रिकेट को बदल दिया

26 नवंबर 2008, मुंबई। बुलेट्स, ब्लास्ट्स, और आतंक की काली रात। उसके बाद भारत ने पाकिस्तान से क्रिकेटिंग रिश्ते तोड़ दिए। उस वक्त लगा था कि ये अस्थायी होगा, भावनाओं का उबाल है, वक्त के साथ सुलह होगी। लेकिन नहीं। IPL से पाकिस्तानी खिलाड़ियों को बाहर किया गया, और 2009 से अब तक—कोई द्विपक्षीय सीरीज नहीं।

वो एक ऐसा मोड़ था जिसने राइवलरी को वर्ल्ड कप, चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप जैसे मंचों तक सीमित कर दिया। मगर अब—अब तो वो भी नहीं होगा।


अध्याय 2: 2025—कश्मीर, कूटनीति और क्रिकेट का कोलैप्स

2025 के अप्रैल महीने में कश्मीर के पहलगाम में जो कुछ घटा, उसने पूरे देश को झकझोर दिया। 140 करोड़ भारतीयों का खून खौल उठा। सोशल मीडिया से लेकर संसद तक, एक स्वर गूंजा:
“अब बहुत हुआ। अब क्रिकेट नहीं।”

सरकार ने तुरंत फैसले लिए।

  • पाकिस्तान की किसी भी लीग को भारत में दिखाने पर बैन।
  • PSL के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स खत्म।
  • FanCode जैसी स्ट्रीमिंग ऐप्स को कोर्ट ने फटकारा।
  • बीसीसीआई ने ICC को साफ कहा: “हम पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी फॉर्मेट में, किसी भी मैदान पर नहीं खेलेंगे। न्यूट्रल वेन्यू भी नहीं।”

अध्याय 3: क्रिकेट से पहले देश—एक नई विचारधारा

कुछ लोगों ने सवाल उठाए: “क्या खेल को राजनीति से जोड़ना सही है?”
लेकिन जवाब भी उतना ही स्पष्ट था:

“जब बात देश के घावों की हो, तो बल्ले और बॉल से बड़ा कुछ नहीं होता।”

कई क्रिकेट प्रेमी टूट गए, लेकिन उनका दिल भी समझता है—शहीद हुए जवानों की चिताओं से बड़ा कोई राइवलरी नहीं।


अध्याय 4: इतिहास की यादें—एक पल, एक रन, एक हार

भारत-पाक मैचों के वो अनगिनत लम्हें अब यादों में बदल जाएंगे:

  • 1996 वर्ल्ड कप क्वार्टरफाइनल – जब वेंकटेश प्रसाद ने आमिर सोहेल की गिल्लियां उड़ा दीं।
  • 2003 वर्ल्ड कप – जब सचिन ने शोएब अख्तर को बैकफुट पंच में मारा, ऐसा लगा जैसे पूरी दुनिया झूम उठी।
  • 2007 T20 वर्ल्ड कप फाइनल – मिस्बाह के स्कूप ने एक देश को रुला दिया और दूसरे को रुला के हँसा दिया।
  • 2022 T20 वर्ल्ड कप – जब विराट कोहली ने मेलबर्न में करिश्मा किया, और 90,000 की भीड़ झूम उठी।

अब ये सब—बस इतिहास हैं। किताब के पन्नों में बंद यादें हैं। दोबारा नहीं दोहराए जाएंगे।


अध्याय 5: राजनीति और खेल—एक उलझी हुई गाँठ

क्रिकेट हमेशा से डिप्लोमेसी का हिस्सा रहा है। 1987 में जब राजीव गांधी और जनरल जिया-उल-हक जयपुर में मैच देखने आए थे, तब भी राजनीति और क्रिकेट एक-दूसरे की ओर बढ़े थे।
लेकिन अब 2025 में, दरारें इतनी गहरी हैं कि मैदान भी छोटा पड़ रहा है। पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया। भारत ने सिंधु जल संधि को रिव्यू करने की बात कही।

जब देश युद्ध की तैयारी में दिखे, तो क्रिकेट के मैदानों में गेंद और बल्ला बेमानी लगते हैं।


अध्याय 6: ICC, चुप्पी और मजबूरी

ICC की भूमिका अब विवादों में है। बीसीसीआई ने साफ कहा है कि भारत पाकिस्तान के साथ किसी भी ICC टूर्नामेंट में न तो खेलेगा, न ही ग्रुप में होगा।

इसका सीधा असर 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी और 2026 T20 वर्ल्ड कप पर पड़ेगा। भारत न खेलेगा, न पाकिस्तान आएगा। न्यूट्रल वेन्यू की बात भी अब निरर्थक हो चुकी है।

ICC की मजबूरी ये है कि भारत क्रिकेट का आर्थिक स्तंभ है। बिना भारत के, टूर्नामेंट की ब्रॉडकास्टिंग वैल्यू आधी रह जाएगी। अब ICC को फैसला लेना है—पैसा या पॉलिटिक्स।


अध्याय 7: PSL का बहिष्कार—क्लियर कट मेसेज

पहली बार भारत की अदालत ने किसी विदेशी लीग पर इतना सख्त रुख अपनाया है। PSL की स्ट्रीमिंग बंद, प्रमोशन बंद, विज्ञापन बंद।
इस फैसले का नतीजा सिर्फ क्रिकेट नहीं, पाकिस्तान के स्पॉन्सरशिप मॉडल पर भी पड़ा है।

जहाँ एक ओर IPL में ग्लोबल ब्रांड्स कतार में हैं, वहीं PSL अब “रिजनल टूर्नामेंट” जैसा बनता जा रहा है। और अब भारतीय दर्शक भी PSL के नाम से कट चुके हैं।


अध्याय 8: एक अधूरी कहानी—अली बनाम विराट, बाबर बनाम बुमराह

सबसे बड़ा नुकसान क्रिकेट प्रेमियों का है।

  • विराट बनाम शाहीन अफरीदी—अब फिर कभी नहीं होगा।
  • जसप्रीत बुमराह की यॉर्कर बाबर आज़म को नहीं मिलेगी।
  • मोहम्मद सिराज और फखर ज़मान की स्लेजिंग नहीं दिखेगी।
  • नवाज का नो बॉल और कोहली की फिनिश—वो लम्हा अब अमर हो चुका है। दोबारा नहीं आएगा।

अध्याय 9: नई राइवलरी—ऑस्ट्रेलिया ही अब दुश्मन है

अब भारत को एक नई क्रिकेट दुश्मनी तलाशनी होगी।
और शायद वो ऑस्ट्रेलिया ही है।

2018-2023 तक की गाथा देखें:

  • बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की आग।
  • गाबा में जीत।
  • वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में टक्कर।
  • रोहित बनाम कमिंस।
  • कोहली बनाम स्मिथ।
  • सिराज बनाम वॉर्नर।

शायद यही अब “नई सबसे बड़ी राइवलरी” है।


निष्कर्ष: एक युग का अंत

कभी नहीं सोचा था कि “इंडिया वर्सेस पाकिस्तान” जैसे वाक्य भी एक दिन पास्ट टेन्स में लिखे जाएंगे।

लेकिन अब वक्त यही है। एक सदी की सबसे आग उगलती राइवलरी अब विराम पा चुकी है। और अगर हालात नहीं बदले, तो यह विराम स्थायी भी हो सकता है।

कहानी अब IPL, WTC, और एशेज की होगी। इंडिया पाकिस्तान की जगह अब प्लेयर्स टू वॉच में ऑस्ट्रेलियन होंगे, और मेमे इंडिया वर्सेस इंग्लैंड पर बनेंगे।

पर जो लहर इंडिया-पाक मैच के दिन आती थी—वो अब कभी नहीं आएगी।


“अब जब नाम पूछा जाएगा सबसे बड़ी राइवलरी का,
तो एक उदासी के साथ जवाब आएगा—थी, लेकिन अब नहीं है।”

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