“चल गए तो चांद तक, नहीं तो शाम तक…”
सनराइजर्स हैदराबाद 2025 की यही कहानी है। कभी पावरप्ले में 100 मारते हैं, कभी 24 रन पर चार विकेट गंवाकर रविशन कुमार की लाइन सच कर देते हैं — “जिंदगी झंड, फिर भी घमंड!”
टीम ऐसी कि प्लेयर अच्छे हैं, पर परफॉर्मेंस वैसी जैसे Wi-Fi का सिग्नल – कभी भी, कहीं भी गायब!
1. टॉप ऑर्डर या टॉस के बाद टेंशन?
24 पर 4, 35 पर 5, और 6 ओवर में सिर्फ 24 रन।
ट्रेविस हेड – टुल्ला टाइटल विनर, इस मैच में जीरो।
ईशान किशन – बिना आउट हुए आउट,
अभिषेक शर्मा – 13 पर चले गए शाम तक,
नीतीश रेड्डी – फायर टू फ्लावर,
अनिकेत वर्मा – उम्मीद टू उम्मीदी खत्म।
इतना जलील तो SRH उस दिन हुआ जब केएल राहुल से कप्तानी छीनी थी, और आज वही कप्तान बनी मुंबई ने उनकी बखिया उधेड़ दी।
2. ईशान किशन: “One Hit Wonder” का मुकुटधारी
106 की इनिंग मारने के बाद जैसे किसी ने उन्हें IPL से बैन कर दिया हो।
पिछले सात मैच:
- 27 गेंद – 33 रन
- छ: बार सिंगल डिजिट
- स्ट्राइक रेट – स्कूल क्रिकेट वाली
इस IPL का सबसे बड़ा भ्रम – ईशान किशन is back! नहीं भाई, “ईशान किशन is cracked!”
3. पैट कमिंस: ‘तोप से फुसकी बम’
कप्तान बना दिया 20 करोड़ देकर। पर न वो टीम को चला पा रहे हैं, न खुद को।
एक भी ऐसा मैच नहीं जिसमें उन्होंने टीम को बैक किया हो।
डगआउट में एक्सप्रेशन वही – “अबे ये क्या हो गया!”
पिच पढ़ नहीं पा रहे, प्लेइंग इलेवन से छेड़खानी नहीं कर पा रहे। कप्तानी ऐसे कर रहे हैं जैसे गूगल मैप में रूट फिक्स नहीं मिल रहा।
4. बॉलिंग यूनिट: नाम बड़े, काम छोटे
- हर्षल पटेल – पर्पल कैप से पर्पल हार
- संदीप शर्मा – मलिंगा की उम्मीदें, फुल टॉस की रियलिटी
- जीशान अंसारी – Rashid Khan का फैन क्लब
- नीतीश रेड्डी – अब न स्पीड, न डेथ ओवर क्लास
पिच चाहे कैसी भी हो, SRH की बॉलिंग यूनिट सबको बल्लेबाज बना देती है। टेलेंडर्स भी इनके खिलाफ शतक का सपना देख लेते हैं।
5. प्लेइंग XI में मोटिवेशन का ‘सुनामी सूखा’
टीम में ना कोई आग है, ना जूनून।
कोई लड़ने वाला नहीं।
SRH ऐसे खेल रहा है जैसे हर मैच “चलेगा तो चलेगा, नहीं तो अगली फ्लाइट से घर”।
नतीजा: सबसे लो स्कोर, सबसे बड़ी निराशा
CSK का मज़ाक उड़ाया था सबने, अब खुद 24/4 पर खड़े हैं।
6 ओवर – 24 रन
9 ओवर – 37 रन
ये IPL है, जनाब, मोहल्ला प्रीमियर लीग नहीं।
प्लेयर वाइज़ अंतिम संस्कार रिपोर्ट:
- हेड: आउट ऑफ फॉर्म
- अभिषेक: इन एंड आउट
- ईशान: नाम नहीं चलेगा
- रेड्डी: लास्ट ईयर हीरो, इस साल जीरो
- कमिंस: बुलेट ट्रेन वाली उम्मीद, पैसेंजर वाली परफॉर्मेंस
एक और बात…
SRH से निकले माकरम, LSG में जा के आग लगा रहे हैं।
मतलब SRH एक ऐसी जॉब है जहां से रेजिग्नेशन के बाद करियर बनता है!
निष्कर्ष:
सनराइजर्स हैदराबाद, तुम IPL की “फ्लिपकार्ट दीवाली सेल वाली हेडफोन” बन गए हो।
रेटिंग 5 स्टार, पर डिलीवरी में फुस्स।
SRH फैंस को यही कहेंगे:
“आंसुओं में IPL देखो, उम्मीदें कम रखो!”
बाकी तो भाई – “थैंक यू, टाटा, गुडबाय!”
